Mohammad

Kolambas

2011-07-02 02:25:32 (UTC)

चाणक्य निति

चाणक्य निति:-
1.अपने धन का नास, मन का संताप, स्त्री का चरित्र, नीच मानव की कही बात, अपना अपमान यह बाते किसी को नहीं बतानी चाहिए.
2. तिन बातो में संतोष धारण करना चाहिए.
अपनी स्त्री, भोजन और धन में.
3. दो ब्रह्मणों के बीच में से, ब्रह्मण और अग्नि के बीच से, स्वामी और सेवक के बिच से, स्त्री-पुरुष के बिच से, हल तथा बैल के बिच से नहीं निकलना चाहिए.
4. अपने से प्रबल शत्रु को उसके अनुकूल चलकर, दुष्ट शत्रु को उसके प्रतिकूल चलकर और समान बल वाले शत्रु का विनय और बल से निचा दिखाना चाहिए.
5. जिनके धन रहता है उसके मित्र होते है, जिसके पास अर्थ होता है उसी के बंधू होते है. जिसके धन रहता है वही पुरुष गिना जाता है. जिसके अर्थ है वही जीता है.
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