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2010-12-04 07:40:16 ( UTC )

संवेदना शुद्धि क्रिया (ऊर्जा योग)

सुख समृधि और शांति तो हर कीसीको चाहिये क्योंकि इस सारे संसारमे आप जहां भी नजर डालोगे वहां अशांति और बेचैनी ही ज्यादा दिखाई देती है किसी न किसी तरीके से हम नकारात्मक भावनाओं की अनुभूति करते रहते है| “क्यों हम अशांत और बेचैन रहते है?”... “क्यों हम दुखी होते रहते है?”... अब तक हमारे पास इन सारी समस्याओं के सही उत्तर नहीं थे इसीलिए हम हमारे भाग्य या कर्म की थियरी से अपने मन को मनाते रहते है, या किसी धार्मिक दार्शनिक मान्यताओ का सहारा लेते आ रहे है, या फिर हमारे मनको किसी और बातों में उल्जाते आ रहे है... हाँ... इससे थोड़ी सहायता जरुर मिलती है... पर इन्सान दुखी तो होता ही रहेता है... और यह एक विषचक्र है| हमारे मन मे अनेक प्रकार की विकृतियाँ पैदा होती है| जब हम क्रोध... लोभ... लालच... मोह माया... अहंकार... राग... द्वेष...भय... दर्द... अपराधभाव... क्षोभ... पछतावा... आदि... जैसी तीव्र नकारात्मक भावनाओं के शिकार होते है तब हम हिल जाते है और विचलित होकर मन का संतुलन खो बैठते है| हम खुद दुखी होते है और दूसरों को भी दुःख पहोचाते है! और कभी कभी तो इस दुःख की मात्रा का अनुभव बहोत ज्यादा होता है... और इन्सान कुछभी कर बैठता है, या इसी कारन कई प्रकार की बीमारियों के भोग बनते है| अब तो सब जान गए है कि हमारे जीवन की उल्जी हुई भावनात्मक समस्याएं एवं मनोविकार के कारन हमारे शरीर मे ज्यादातर रोग उत्पन्न होते है| यह सब विकारों के पैदा होने का कारन क्या है? हमारे जीवन मे जब भी कोई अप्रिय घटना घटती है तब उस घटना की प्रतिक्रिया के रूप मे ऐसी विकृतिया पैदा होती है... तो क्या यह मुमकिन है की दुनिया मे कभी कोई अप्रिय घटना बने ही नहीं? जीवन मे कभी न कभी तो मुश्किल समय आता ही है| विकृतिया किस कारन पैदा होती है उसके पीछे भी एक खास विज्ञान है और यह पद्धति उस शुद्ध सिधान्तो पर रची हुई बिलकुल नई ही योग-क्रिया है जिसे हम उर्जा-योग से जानेंगे| संवेदना शुद्धि क्रिया के द्वारा इन सभी विकृतियों से पैदा हुई नकारात्मक असरो को आसानी से मिटाना मुमकिन है और इन्सान अपने आप ही सभी परिस्तिथियों मे भी अपने मन को शांत और संतुलित रख सकते है... ज्यादा विकट परिस्थितियों मे भी इन्सान का मानसिक संतुलन बना रहता है इसलिए मन मे तटस्थ और साक्षीभाव अपनेआप ही उत्पन्न होता है और जीवन सुख और समृधि से भर जाता है| यह पद्धति मानव शरीर मे रही सूक्ष्म-उर्जा प्रणाली पर आखरी शतक मे जो प्रभावी संशोधन किये गए है उस पर एवं बहोत ही प्राचीन संशोधन पर आधारित है... आज के इस यूग मे स्व-विकास के लिए और शारीरिक एवम मानसिक तंदुरस्ती और भावनात्मक आजादी को प्राप्त करने के लिए विकसीत की गई एक बिलकुल ही सरल और असरदार स्व-विकास साधना पद्दति है| हजारों वर्षों से प्राचीन भारत के ऋषि-मुनियों ने प्रकृति के इस गुढ़ रहस्य को गहराई से जाँच कर शुद्ध ध्यान साधना के द्वारा अत्यंत सुक्ष्म निरिक्षण करके यह खोज निकाला है की जब मन मे कोई विकृति या नकारात्मक भावनाएं पैदा होती है तब हमारा शरीर उसकी प्रतिक्रिया देता है और श्वास की गति मे अस्वाभाविक बदलाव होने लगता है और शरीर मे अति सुक्ष्म स्तर पर कोई जैव-रासायनिक प्रक्रिया होती है| ऐसा होने का कारन और कहीं नहीं है पर हमारे शरीर के उर्जा प्रवाह मे जो अड़चन या विक्षेप पैदा होते है उसके कारन मन मे और शरीर मे यह नकारात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है| यह साधना पद्धति के द्वारा लगभग सभी प्रकार की भावनात्मक समस्याएं, शारीरिक तंदुरस्ती एवं कार्यक्षमता से संलग्न समस्याओ मे बहोत ही असरदार परिणाम प्राप्त हो सकते है और तुरंत ही सफल परिणाम मिलना मुमकिन है... और कभी कभी तो जब सारे प्रयोग नाकामयाब रहे हो ऐसे समय भी इस साधना पद्धति के द्वारा अच्छे परिणाम मिलना संभव हो सकता है| -------------------------------------------------------------------------जैसे की आगे बताया गया है की संवेदना शुद्धि क्रिया का मुख्य सिद्धांत तो लगभग ५००० साल पुरानी इलाग की रीत के शास्त्रों और ध्यान पद्धतियो पर आधारित है| अलग अलग ध्यान पद्धतियों और दूसरी प्रक्रिया के द्वारा अपने शरीर मे पैदा हो रही सुक्ष्म संवेदनाओ का अनुभव प्राप्त करके हम अपने शरीर मे रहे उर्जा-प्रवाहों के मूल केन्द्रों पर हल्के से स्पंदन पैदा करना होता है| और यह प्रक्रिया बहोत ही सरल और अत्यंत ही आरामदायक है| संवेदना शुद्धि क्रिया के लिए सबसे अच्छी बात यह है की यह ध्यान पद्धति किसी अन्य ध्यान पद्धतियों या किसी परंपरागत हीलिंग तरीके या अन्य कोई ऑल्टरनेटीव थेरपी से पूरी तरह से अलग है क्योंकि इस पद्धति की मूल प्रक्रिया मे “भावनात्मक’’ गुण भी प्रतियक्ष रूप से जुड़े हुए है जो दूसरी किसी भी पद्धतियो मे सीधी या किसी भी दूसरे रूप से सामिल नहीं की गई है| संवेदना शुद्धि कार्य के अंतर्गत अपने जीवन के भावनात्मक प्रश्नों की उल्जन जो की कभी सुल्जाई नहीं गई और उसके कारन जो विकृतिया और नकारात्मक भावनाए पैदा होती है वही नकारात्मक भावनाए ही अपने जीवन मे पैदा होती लगभग सभी समस्याओ का मुख्य कारन बनता है ऐसा मानकर हुआ उस नकारात्मक भावनाओ को पैदा करनेवाले सभी मूल तत्वों पर उर्जा शुद्धि स्पंदन के द्वारा कार्य किया जाता है और उसकी नकारात्मक असरो को दूर किया जाता है| संवेदना शुद्धि क्रिया मे सभी प्रश्नों के मूल मे जो मुख्य कारन छुपा होता है उसी कारन पर ही कार्य किया जाता हैं और संवेदना शुद्धि कार्य मे खास बात तो यह है की यह कार्य सीधे ही हमारे प्रश्न और प्रश्न के मूल मे ही कार्य किया जाता है कोई दुसरे निति नियम या किसी भी दुसरे प्रलोभन के द्वारा कार्य नहीं किया जाता| इसलिए ही संवेदना शुद्धि क्रिया के द्वारा हमें बहोत ही जल्द भावनात्मक या किसी भी दूसरी समस्याओ का निराकरण मिल जाता है| हमारे जीवन मे हुए किसी भी अप्रिय या नकारात्मक घटनाओ के अनुभव के द्वारा हमारे शरीर मे रहे उर्जा-तंत्र मे एक या कई जगहों पर अडचने (रूकावटे) पैदा होती है और इसके कारन हमारे अर्ध्जग्रुत मन मे उस नकारात्मक अनुभव की याद के साथ उर्जाविक्षेप भी जुड जाता है| इसलिए जब भी हम उन नकारात्मक अनुभवों को याद करते है तब हमारी उर्जा प्रणाली मे फिरसे वही विक्षेप पैदा होते है और इसकी फलश्रुति मे हमें फिरसे अस्वस्थता का अनुभव होता है| संक्षेप मे कहा जाये तो हमारे शरीर मे अन्य किसी कारन से नहीं लेकिन हमारे उर्जा-तंत्र मे पैदा हुए उन विक्षेप और अडचनों के कारन ही यह सारी नकारात्मक भावनाए पैदा होती है... उर्जा-तंत्र मे पैदा हुई इन समस्याओ को जो किसी भी तरीके से दूर किया जाए तो उसके साथ जुडी हुई नकारात्मक भावनाओ को भी दूर किया जा सकता है और समस्याओ मे तुरंत ही आराम मिलता है| जब तक उर्जा-तंत्र मे पैदा हुई अडचने दूर नहीं होती तब तक हमें उन नकारात्मक भावनाओ का अनुभव होता ही रहता है और हमारी समस्या वैसी की वैसी ही रहती है उसमे कोई फायदा नहीं होता है| हमारी उर्जा मे हुए इस विक्षेप को संवेदना शुद्धि क्रिया(उर्जा योग) के द्वारा बहोत ही सरलता से दूर किया जा सकता है और नकारात्मक भावनाओ से तुरंत ही बाहर निकला जा सकता है... इसके फलस्वरूप इन नकारात्मक भावनाओ के द्वारा पैदा हुई सारी समस्याओ से भी मुक्ति पा सकते है| इसलिए संवेदना शुद्धि क्रिया के द्वारा लगभग सभी प्रकार के भावनात्मक प्रश्नों, शारीरिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता से जुड़े सभी प्रश्नों मे बहोत ही असरदार रूप से और तुरंत ही अत्यंत सफल परिणाम प्राप्त हो सकते है| ------------------------------------------------------------------------------------------------------------ संवेदना शुद्धि क्रिया के द्वारा हर प्रकार की नकारात्मक भावनाओ को दूर किया जा सकता है और इसी कारन से जीवन मे पैदा होती लगभग सभी प्रकार की समस्याओ मे बहोत ही सुंदर और आश्चर्यजनक परिणाम मिलते है, जैसेकि... भावनात्मक समस्याएं • डर और फोबिया • रिश्तों की समस्याएं • क्रोध एवं चिंता • अपराधभाव • डिप्रेशन एवं तनाव • नकारात्मक यादें • उन्निन्द्रता • व्यसनों (हर प्रकार के) • ट्रोमा (PTSD) • OCD (Obsessive Compulsive Disorder) • व्यर्थ नकारात्मक विचार • अन्य सयाकोलोजिकल समस्याएं व्यक्तिगत कार्यक्षमता • मोटापा • व्यावसायिक समस्याएं • समृद्धि प्राप्ति • अंगत जीवन की समस्याएं • स्पोर्ट्स पर्फोर्मंस • रचनात्मकता एवं प्रदर्शन कला • लेखन एवं साहित्य सर्जन बच्चो की समस्याएं • आचार एवं आदतें • पढाई की समस्याएं • डिस्लेक्सिया • हाइपर-एक्टिवनेस • डर एवं फोबिया • बेड-वेटिंग (बिस्तर गीला करना) शारीरिक समस्याएं • एलर्जी एवं माइग्रेन • अस्थमा एवं सांस की बिमारियां • हर प्रकार की शारीरिक पीडाए • ब्लड-प्रेसर (हाई और लो) • कैन्सर • इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम (IBS) • पार्किन्सन डिसीज • क्रोनिक फटिंग सिंड्रोम • जलना या शारीरिक घाव को भरने के लिए • अन्य शारीरिक एवं जटिल बिमारियां हर प्रकार के व्यसन • शराब, तंबाकू, सिगरेट, गुटखा, जुआ, ड्रग्स या अन्य इसके अलावा और भी कई समस्याओं मे संवेदना शुद्धि क्रिया के द्वारा अत्यंत अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते है|

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